1चोक कुंडली का शक्ति गुणांक है

(A) 90°
(B) 0
 
(C) 1
(D) 180°

 

2प्रतिबाधा (Impedance) का S.I. मात्रक होता है –

(A) हेनरी
(B) ओम
 
(C) टेसला
(D) इनमें से कोई नहीं

 

3प्रत्यावर्ती विभव लगाने पर एक दिष्ट धारा उत्पन्न करने वाले संयंत्र का नाम है –

(A) रेक्टिफायर 
(B) ट्रांसफॉर्मर
(C) ऑसिलेटर
(D) फिल्टर

 

4एक प्रतिरोधक R की श्रेणी में एक संधारित्र C जोड़ देने पर प्रतिरोधक की धारा की कला में परिवर्तन होता है –

(A) कोई कला परिवर्तन नहीं
(B) कला में 
π/2 का परिवर्तन होता है
(C) कला में 
π का परिवर्तन होता है
(D) इनमें से कोई नहीं
 

 

5चोक कुण्डली का कार्य सिद्धान्त निम्न पर आधारित है :

(A) कोणीय संवेग संरक्षण
(B) स्वप्रेरण
 
(C) अन्योन्य प्रेरण
(D) संवेग संरक्षण

 

6यांत्रिक ऊर्जा को वैद्युत ऊर्जा में बदलने के लिए हम प्रयोग करते हैं –

(A) दिष्ट धारा डायनेमो 
(B) मोटर
(C) एसी मोटर
(D) ट्रांसफॉर्मर

 

7निम्नलिखित में से किसके लिए संधारित्र अनंत प्रतिरोध की तरह कार्य करता है ?

(A) DC 
(B) AC
(C) DC तथा AC दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं

 

8विधुतलेपन में व्यवहार आने वाली धारा होती है –

(A) दिष्ट धारा (D.C.) 
(B) प्रत्यावर्ती धारा (A.C.)
(C) भँवर धारा
(D) इनमें से कोई नहीं

 

9किसी L-C-R परिपथ में ऊर्जा का क्षय होता है

(A) प्रेरक में
(B) प्रतिरोधक में
 
(C) संधारित्र में
(D) इनमें से सभी में

 

10. A.C. परिपथ में शक्ति केवल व्यय होती है –

(A) प्रेरकत्व में
(B) धारित्व में
(C) प्रतिरोध में
 
(D) उपर्युक्त सभी में

 

11शुद्ध प्रेरकत्व में औसत शक्ति की खपत होती है –

(A) शून्य 
(B) 1/2 Lt2
(C) 5/2Lt2
(D) 1Lt

 

12अपचायी ट्रान्सफॉर्मर बढ़ाता है –

(A) धारा 
(B) वोल्टता
(C) वाटता
(D) इनमें से कोई नहीं

 

13प्रत्यावर्ती धारा का ऊष्मीय प्रभाव प्रमुखतः है –

(A) जूल ऊष्मन 
(B) पेल्टियर ऊष्मन
(C) टॉमसन प्रभाव
(D) इनमें से कोई नहीं

 

14. A.C. का r.m.s मान तथा शिखर मान का अनुपात है –

(A) 2
(B) 1/
2 
(C) 1/2
(D) इनमें से कोई नहीं

 

15प्रतिबाधा का मात्रक होता है –

(A) हेनरी
(B) ओम
 
(C) टेसला
(D) इनमें से कोई नहीं

 

16वह यंत्र जो यांत्रिक ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में बदलता हैकहा जाता है –

(A) ट्रांसफॉर्मर
(B) प्रेरण कुण्डली
(C) डायनेमो
 
(D) मोटर

 

17ट्रांसफॉर्मर के क्रोड को परतदार रखा जाता हैरोकने के लिए –

(A) ऊर्जा क्षय 
(B) द्रव्यमान क्षय
(C) आवेश क्षय
(D) इनमें से कोई नहीं

 

18एक समान चुम्बकीय क्षेत्र () में समरूप कोणीय वेग (ωसे घूमने वाली कुण्डली में प्रेरित वि०वा० बल का मान होता है –

(A) nAB ωsinωt 
(B) nAB 
ω cos ωt
(C) nAB 
ω tanωθ
(D) nAB 
ω2sin ωt

 

19प्रत्यावर्ती धारा के एक पूर्ण चक्र पर प्रत्यावर्ती धारा का औसत मान –

(A) Imax
(B) शून्य
 
(C) 
¯2
(D) I
¯2

 

20एक पूरे चक्र में प्रत्यावर्ती धारा का माध्य मान होता है –

(A) शून्य 
(B) 2l
(C) l /2
(D) l

 

21तप्त-तार आमीटर मापता हैप्रत्यावर्ती धारा का –

(A) उच्चतम मान
(B) औसत मान
(C) मूल औसत वर्ग धारा
 
(D) इनमें से कोई नहीं

 

22ट्रांसफॉर्मर के कोर को परतदार बनाया जाता हैताकि –

(A) उच्च धारा प्रवाहित हो सके
(B) उच्च विभव प्राप्त हो सके
(C) भँवर धाराओं द्वारा होने वाली हानि कम की जा सके
 
(D) अधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सके

 

23किसी LCR परिपथ में ऊर्जा का क्षय होता है –

(A) प्रेरक में 
(B) प्रतिरोधक में
(C) धारित्र में
(D) इनमें से कोई नहीं

 

24घरेलू विधुत्-आपूर्ति की आवृत्ति 50 हर्ट्ज है। धारा का मान शून्य होने की आवत्ति होगी –

(A) 25 
(B) 50
(C) 100
(D) 200

 

25भारत में आपूर्ति की जा रही प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति है –

(A) 50 हर्ट्स 
(B) 60 हर्ट्ज
(C) 100 हर्ट्स
(D) 220 हर्ट्स

 

26एक प्रतिदीप्ति लैम्प में चोक का उद्देश्य है –

(A) धारा को बढ़ाना
(B) धारा में कमी करना
 
(C) किसी क्षण पर वोल्टेज को बढ़ाना
(D) इनमें से कोई नहीं

 

27ट्रांसफॉर्मर में विधुत ऊर्जा का ऊष्मा में रूपांतरण को कहा जाता है –

(A) कॉपर लॉस 
(B) लौह क्षय
(C) शैथिल्य ह्रास
(D) इनमें से कोई नहीं

 

28प्रेरणिक प्रतिघात होता है –

(A) ωL 
(B) 
ω2L2
(C) 1 / 
ωL
(D) 1 / 
ωC

 

29प्रतिघात का मात्रक होता है –

(A) ओम 
(B) फैराडे
(C) एम्पेयर
(D) म्हो

 

30धारितीय प्रतिघात होता है –

(A) ωL
(B) 1 / 
ωL
(C) 
ωC
(D) 1 / 
ωC 

 

31धारितीय प्रतिघात का मात्रक है –

(A) फैराडे (F)
(B) ओम (
Ω) 
(C) मैक्सवेल
(D) ऐम्पियर (A)

 

32युक्ति जो वोल्टता को बढ़ा देता है उसे क्या कहते हैं ?

(A) प्रतिरोध
(B) अपचायी ट्रांसफॉर्मर
 
(C) उच्चायी ट्रांसफॉर्मर
(D) ट्रांसफॉर्मर

 

33. LC परिपथ की दोलन की आवृत्ति ƒहै। यदि धारिता एवं प्रेरकत्व दोनों दुगुना कर दिया जाए तो उसकी आवृत्ति होगी –

(A) ƒ/4
(B) 2ƒ
(C) 4ƒ
(D) ƒ/2
 

 

34एक चोक कुण्डली का व्यवहार परिपथ में धारा को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है –

(A) केवल a.c. परिपथ में 
(B) केवल d.c. परिपथ में
(C) दोनों a.c. तथा d.c. परिपथों में
(D) इनमें से कोई नहीं

 

35संधारित्र का शक्ति गुणांक लगभग है –

(A) 90°
(B) 1
(C) 180°
(D) 0
 

 

36निम्नलिखित में से किसके लिए संधारित्र अनंत प्रतिरोध की तरह कार्य करता है ?

(A) DC 
(B) AC
(C) DC तथा AC दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं

 

37. L-C परिपथ को कहा जाता है –

(A) दोलनी परिपथ 
(B) अनुगामी परिपथ
(C) शैथिल्य परिपथ
(D) इनमें से कोई नहीं

 

38एक प्रत्यावर्ती विधुत धारा का समीकरण I = 0.6 sin 100πt से निरूपित है। विधुत धारा की आवृत्ति है –

(A) 50 π
(B) 50
 
(C) 100
π
(D) 100

 

39शक्ति गुणक किसके बीच बदलती है ?

(A) 3.5 और 5
(B) 2 और 2.5
 
(C) 0 और 1
(D) 1 और 2

 

40किसी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में धारा एवं विभवान्तर के बीच कलान्तर θ है। तब शक्ति गुणांक होगा :

(A) cosθ 
(B) sin
θ
(C) tan
θ
(D) 1
θ

 

41. A.C. का समीकरण i = 50 sin 100t है तो धारा की आवृत्ति होगी –

(A) 50π हर्ट्ज
(B) 50/
π हर्ट्ज 
(C) 100 
π हर्ट्ज
(D) 100/
π हर्ट्ज

 

42श्रेणीबद्ध LCR परिपथ का शक्ति गुणक होता है।

(A) R
(B) Z/R
(C) R/Z
 
(D) RZ

 

43एक प्रत्यावर्ती धारा की शिखर वोल्टता 440V है। इसकी आभासी वोल्टता के है –

(A) 220V
(B) 440V
(C) 220
2V 
(D) 440
2V

 

44यदि प्रत्यावर्ती धारा तथा विधुत वाहक बल के बीच Φ कोण का कलांतर हो. तो शक्ति गुणांक का नाम होता है –

(A) tanΦ
(B) cos2
Φ
(C) sin
Φ 
(D) cos
Φ

 

45यदि धारा और विभवान्तर के बीच कलान्तर φ हो तो शक्ति गुणांक होता है –

(A) sinφ
(B) cos
φ 
(C) tan
φ
(D) none

 

46. A.C. परिपथ की औसत शक्ति है –

(A) EνIν
(B) E
ν . Iν cosΦ 
(C) E
νIν sin Φ
(D) शून्य

 

47. 220 वोल्ट a.c. की मुख्य शिखर वोल्टता होती है-

(A) 155.6 वोल्ट्स
(B) 220.0 वोल्ट्स
(C) 311 वोल्ट्स
 
(D) 440 वोल्ट्स

 

48शुद्ध धारित्व में औसत शक्ति की खपत होती है –

(A) 1/2 CV2 
(B) CV2
(c) 1/4 CV2
(D) शून्य

 

49. 110 V प्रत्यावाती परिपथ का शिखर मान होता है –

(A) 220 V
(B) 110
¯2V 
(C) 300 V
(D) 200 V

 

50प्रत्यावर्ती विधुत्-धारा परिपथ में अनुनाद की अवस्था में धारा और वि०वा० बल के बीच का कलान्तर होता है –

(A) π/2
(B) 
π/4
(C) शून्य
 
(D) इनमें से कोई नहीं

 

51. L-C-R परिपथ में विधुत् अनुनाद होने के लिए आवश्यक है –

(A) ωL = 1 / ωC 
(B) R = 
ωL
(C) L = 
ωC
(D) इनमें से कोई नहीं

 

52यदि प्रत्यावर्ती धारा तथा वि०वा० बल के बीच कलान्तर Φ होतो शक्ति गुणांक (Power factor) मान होता है –

(A) tanΦ
(B) cos2
Φ
(C) sin
Φ
(D) cos
Φ 

 

53यदि किसी प्रत्यावर्ती-धारा परिपथ की यथार्थ और आभासी शक्तियाँ क्रमश: PT और PA होंतो शक्ति गुणांक –

(A) PT/PA 
(B) PT . PA
(C) PA/PT
(D) PA + PT

 

54किसी प्रत्यावर्ती परिपथ में धारा i = 5 cos wt एम्पियर तथा विभव V = 200 sin wt वोल्ट है। परिपथ में शक्ति हानि है-

(A) 20 W
(B) 40 W
(C) 1000 W
(D) Zero
 

 

55प्रत्यावर्ती धारा का समीकरण I = 60 sin 100 π t हैधारा के मूल-माध्य-वर्ग का मान होगा –

(A) 60¯2
(B) 60 / 
¯2 
(C) 100
(D) शून्य

 

56केवल प्रतिरोध युक्त प्रत्यावर्ती विधुत्-परिपथ में धारा तथा वि०वा० बल के बीच कलान्तर होता है –

(A) शून्य 
(B) 
π / 2
(C) 
π
(D) 2
π

 

57यदि LCR परिपथ में L= 8.0 हेनरी, C = 0.5 μ F, R = 100 Ω  श्रेणीक्रम में हैंतो अनुनादी आवृत्ति होगी –

(A) 600 रेडियन/सेकेण्ड
(B) 500 रेडियन/सेकेण्ड
 
(C) 600 हर्ट्स
(D) 500 हर्ट्ज

 

58. LCR परिपथ में धारिकत्व को C से बदलकर 4C कर दिया जाता है। समान अनुनादी आवृत्ति के लिए प्रेरकत्व को L से बदलकर होना चाहिए।

(A) 2L
(B) L/2
(C) L4
(D) 4L
 

 

59ट्रान्सफॉर्मर के प्राथमिक तथा द्वितीय कुण्डली में लपेटों की संख्या क्रमशः 1000 तथा 3000 है। यदि 80 वोल्ट के a.c. प्राथमिक कुण्डली में आरोपित किया जाता है तो द्वितीयक कुण्डली के प्रति फेरों में विभवांतर होगा –

(A) 240 वोल्ट
(B) 2400 वोल्ट
(C) 0.024 वोल्ट
(D) 0.08 वोल्ट
 

 

60. LCR परिपथ में धारा के महत्तम मान के लिए होता है –

(A) ω2 = LC
(B) 
ω2 = 1/LC 
(C) 
ω = 1/LC
(D) 
ω = ¯LC

 

61परिपथ में वर्ग माध्य मूल धारा का मान है

(A) 141 A
(B) 2.20A
 
(C) 8.1J
(D) इनमें से कोई नहीं

 

62प्रत्यावर्ती धारा i का समय t के साथ ग्राफ का अवलोकन करें। माध्य धारा का मान शून्य है :

(A) [t1,t3पर 
(B) [t1, t2पर
(C) [0, t1पर
(D) [0, t3पर

 

63. 1/Lω की इकाई है –

(A) R की इकाई
(B) L
ω की इकाई
(C) दोनों की इकाई
(D) इनमें से कोई नहीं
 

 

64. 50Ω का एक प्रतिरोधक 15 V के किसी दोलित्र से जोड़ा गया है। यदि दोलित्र की आवृत्ति 50 Hz तथा 100 Hz पर समंजित की जाएतो परिपथ में प्रवाहित धारा का अनुपात होगा

(A) 1 : 1 
(B) 10 : 3
(C) 1 : 2
(D) 3 : 5

 

65यदि प्रत्यावर्ती धारा तथा विधुत वाहक बल के बीच φ कोण का कलांतर होतो शक्ति गुणांक (power factor) का मान होता है

(A) tanφ
(B) cos2
φ
(C) sin
φ
(D) cos
φ 

 

66प्रत्यावर्ती विधुत-वाहक बल ε = ε sinωt में शिखरमान 10V तथा आवृत्ति 50Hz है। समय t  = 1/600 s पर तात्कालिक विधुत-वाहक बल है

(A) 10V
(B) 5
3V
(C) 5V
 
(D) 1V

 

67. L/R की विमा होती है-

(A) T 
(B) LT-1
(C) L°T2
(D) इनमें से कोई नहीं

 

68. L-C-R परिपथ में विधुत अनुनाद होने के लिए आवश्यक है –

(A) ωC = 1/ωL
(B) 
ωL = 1/ωC 
(C) L = 
ωC
(D) इनमें से कोई नहीं

 

69यदि किसी परिपथ में प्रत्यावर्ती वि०वा० बल का महत्तम मान e० हो तो इसका वर्ग-माध्य मूल मान होगा –

(A) e
(B) e/
¯2 
(C) e/2
(D) e2/2

 

70यदि किसी प्रत्यावर्ती धारा का शिखर मान Imax हो तो वर्ग माध्य मूल मान होगा –

(A) ¯2Imax
(B) Imax 
¯2 
(C) Imax 
¯3
(D) इनमें से कोई नहीं

 

71प्रत्यावर्ती विधुत्-धारा का तात्कालिक मान होता है –

(A) I = Icos2ωt
(B) I = I० / 
¯2
(C) I = I sin
ωt 
(D) I = I2 sin2 
ωt

 

72प्रत्यावर्ती विधुत्-धारा का तात्कालिक मान का समीकरण I = 10 sin 100π t है। इसका शिखर मान है –

(A) 10 A 
(B) 10 / 
¯2 A
(C) 5A
(D) शून्य

 

73प्रत्यावर्ती विधुत्-धारा का शिखर मान I होतब इसका वर्ग-माध्य-मूल मान होगा –

(A) I¯2 
(B) I/2
(C) 2I
(D) शून्य

 

74प्रत्यावर्ती धारा के मूल-माध्य-वर्ग और शिखर मान का अनुपात होता है –

(A) ¯2
(B) 1/
¯2 
(C) 1/2
(D) 2
¯2

 

75आभासी धारा होती है –

(A) ¯2 x शिखर धारा
(B) शिखर धारा / 2
(C) शिखर धारा / 
¯2 
(D) औसत धारा / 
¯2

 

76प्रत्यावर्ती धारा के शिखर मान तथा मूल-माध्य-वर्ग मान का अनुपात है –

(A) 2
(B) 
2 
(C) 1 / 
2
(D) 1 / 2

 

77. A.C. परिपथ में धारा की माप 4 ऐम्पियर है तो उस धारा का अधिकतम परिमाण होगा ?

(A) 4 x 2 ऐम्पियर
(B) 4 x 
¯2 ऐम्पियर 
(C) 4 x 2 x 
¯2 ऐम्पियर
(D) 4 ऐम्पियर

 

78एक LCR परिपथ में अनुनाद प्रस्तुत होता हैजब : (व्यंजकों के जकों के अर्थ सामान्य है )

(A) WL = 1/WC 
(B) WL = WC
(C) W (L+1/C) = 0
(D) इनमें से कोई नहीं

 

79प्रत्यावर्ती धारा परिपथ के LCR श्रेणी संयोजन में वोल्टेज प्रत्येक L,C,R घटक में 50 वोल्ट है। वोल्टेज LC संयोजन के बीच होगा :

(A) 50 Volt
(B) 25 Volt
(C) 100 Volt
(D) 0 Volt
 

 

 

80प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में यदि धारा I एवं वोल्टेज के बीच कलान्तर α हो तो धारा का वाटहीन घटक होगा :

(A) Icosaα
(B) Isin
α 
(C) Itan
α
(D) इनमें से कोई नहीं

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