पाठ के साथ


प्रश्‍न
1 – उत्सव कौन और क्यों मना रहे हैं?
उत्तर – किसी शहर विशेष में रहने वाले सामान्य नागरिक उत्सव मना रहे हैं। उनके उत्सव मनाने के कारण निम्नलिखित हैं

  • कुछ लोगों द्वारा यह बता दिया गया है कि उनकी सेना ने विजय प्राप्त कर ली है और वह युद्ध क्षेत्र से वापस आ रही है।
  • उन्हें इस युद्ध की वास्तविक स्थिति का ज्ञान नहीं है।
  • उन्हें युद्ध में मारे गए लोगों के विषय में कुछ भी पता नहीं है।
  • सच बोलने वाले अपनी जिम्मेदारी का उचित निर्वहन नहीं कर रहे हैं।


प्रश्‍न
2 – नागरिक क्यों व्यस्त हैं? क्या उनकी व्यस्तता जायज है?
उत्तर – नगारिक इसलिए व्यस्त है क्योंकि

  • उन्हें उत्सव मनाने के लिए नाना प्रकार की तैयारियाँ करनी है।
  • उन्हें विजयी भाव प्रदर्शित करते हुए विजयी सेना तथा शासक का स्वागत करना है।
  • उन्हें युद्ध में गए लोगों की संख्या का पता है पर लौटकर आने वालों का ठीक–ठीक पता नहीं है।
  • अर्थात् युद्ध में कितने लोग मारे गए इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्हें तो बस सुखद परन्तु असत्यपूर्ण समाचार ही ज्ञात हुआ है।

उनकी व्यस्तता जायज नहीं है क्योंकि उन्हें वास्तविक स्थिति का पता नहीं है। उन्हें नहीं है पता है कि वास्तव में उनकी जीत नहीं बल्कि हार हुई है।.


प्रश्‍न
3 – किसकी विजय हुई सेना की, कि नागरिकों की? कवि ने यह प्रश्न क्यों खड़ा किया है? यह विजय किनकी है? आप क्या सोचते हैं? बताएँ।
उत्तर – किसी की विजय नहीं हुई। विजय प्रतिपक्ष की हुई। कवि ने देश की वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। कवि के विचारों पर चिन्तन करते हुए यही बात समझ में आती है कि झूठ–मूठ के आश्वासनों एवं भुलावे में हमें रखा गया है। यथार्थ का ज्ञान हमें नहीं कराया जाता। यानि सत्य से दूर रखने का प्रयास शासन की ओर से किया जा रहा है।


प्रश्‍न
4 – ‘खेत रहनेवालों की सूची अप्रकाशित है।’ इस पंक्ति के द्वारा कवि ने क्या कहना चाहा है? कविता में इस पंक्ति की क्या सार्थकता है? बताइए।
उत्तर – ‘खेत रहनेवालों की सूची अप्रकाशित है’ के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि युद्ध में दोनों पक्षों के अनेक वीर मारे जाते हैं। विजय के मद में चूर सेना इन मृत सैनिकों या लोगों की परवाह नहीं करती। वह भूल जाती है कि इस विजय में उनका भी अप्रत्यक्ष योगदान है। उनके बिना विजय मिलनी संभव न थी।

इस पंक्ति की कविता में यह सार्थकता है कि विजय की खुशी में चूर विजयोत्सव मना रहे लोगों को. मरे हुए लोगों तथा सैनिकों का जरा भी ध्यान नहीं है। उनके आश्रितों पर क्या बीत. रही है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। वे तो बस विजयोत्सव मनाने में व्यस्त है।

वास्तव में शासक अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए जनता के जीवन का मोल नहीं समझता है। वह बनावटी राष्ट्रीयता का नारा देकर पूरे राष्ट्र को युद्ध की भीषण ज्वाला में झोंक देता है। वह तो अपना अधिनायकत्व बनाये रखने के लिए युद्ध लड़ते हैं। इस पंक्ति के माध्यम से सत्ता वर्ग की सत्तालोलुप प्रवृत्ति का पर्दाफाश होता है।


प्रश्‍न
5 – सड़कों को क्यों सींचा जा रहा है?
उत्तर – सड़कों को इसलिए सींचा जा रहा है ताकि उनकी धूल–गुबार समाप्त हो सके और युद्ध क्षेत्र से छत्र चंवर और गाजे–बाजे के साथ जो विजयी राजा आ रहे हैं उन पर धूल न उड़े। उन्हें पहले जैसा बनाया जा सके। अर्थात् युद्ध के कारण उनकी टूटी–फूटी हालत में सुधार लाया जा सके।


प्रश्‍न
6 – बूढ़ा मशकवाला क्या कहता है और क्यों कहता है?
उत्तर – बूढ़ा मशकवाला कहता है कि–

  • एक बार फिर हमारी हार हुई है।
  • गाजे–बाजे के साथ विजय नहीं हार लौट रही है।
  • ऐसी विजय पर खुश होकर जश्न मनाने का कोई औचित्य नहीं है वह।

 

ऐसा इसलिए कहता है क्योंकि–

  • बूढा अनुभवी व्यक्ति है। उसे जीवन के यथार्थ का अनुभव है।.
  • उसे पता है कि समाज में घृणा, द्वेष, हत्या, लूटपाट, दंगे, आतंकवाद आदि मानवता के विनाश के कारण बने हुए हैं। इन पर विजय पाए बिना विजय का जश्न मनाना अनुचित है।
  • लोगों को मरने वालों की कोई जानकारी न देकर वास्तविक स्थिति पर पर्दा डाला जा रहा है।
  • उसकी बातों में सच्चाई तो है पर उसे कोई सुनना नहीं चाहता है।


प्रश्‍न
7 – बूढा, मशकवाला किस जिम्मेवारी से मुक्त है? सोचिए, अगर वह जिम्मेवारी उसे मिलती तो क्या होता?
उत्तर – बूढ़ा मशकवाला देश की राजनीति से वंचित है। अगर उसे जिम्मेवारी मिली होती तो हार को हार कहता जीत नहीं कहता। वह सत्य प्रकट करता। उसे तो मात्र सड़क सींचने का काम सौंपा गया है। यही उसकी जिम्मेवारी है। सत्य लिखने और बोलने की मनाही है। इसलिए वह मौन है और अपनी सीमाओं के भीतर ही जी रहा है। वह विवश है, विकल है फिर भी दूसरे क्षेत्र में दखल नहीं देना केवल सींचने से ही मतलब रखता है। इसमेकं बौद्धि वर्ग की विवशता झलकती है। अगर उसे सत्य कहने और लिखने की जिम्मेवारी मिली होती तो राष्ट्र की यह स्थिति नहीं होती। झूठी बातों और झूठी शान में जश्न नहीं मनाया जाता। जीवन के हर क्षेत्र में अमन–चैन, शिक्षा–दीक्षा, विकास की धारा बहती। अबोधता ओर अंधकार में प्रजा विवश बनकर नहीं जीती।


प्रश्‍न
8 – ‘जिन पर है वे सेना के साथ ही जीतकर लौट रहे हैं जिन किनके लिए आया है? वे सेना के साथ कहाँ से आ रहे हैं? वे सेना के साथ क्यों थे? वे क्या जीतकर लौटे हैं? बताएँ।
उत्तर – इन पंक्तियों में ‘जिन’ नेताओं के लिए प्रयोग हुआ है। वे लड़ाई के मैदान से लौट रहे हैं। वे सेना के साथ इसलिए हैं कि सेना सच न बोले। वे हारकर लौटे हैं। इन पंक्तियों में नेताओं के चरित्र पर प्रकाश डाला गया है। उनका जीवन–चरित्र कितना भ्रम में डालनेवाला है। कथनी–करनी में कितना अंतर है? झूठी प्रशंसा और अविश्वसनीय कारनामों के बीच उनका समय कट रहा है। उनके व्यवहार और विचार में काफी विरोधाभास है। तनिक समानता और स्वच्छता नहीं दिखायी पड़ती।


प्रश्‍न
9 – गद्य कविता क्या है? इसकी क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर – दैनदिन जीवन अनुभवों की धरती से बोलचाल बातचीत और सामान्य मन:चिन्तन के रूप में उगा हुआ, विवरणधर्मी और चौरस कविता गद्य कविता है। इस कविता की विशेषता ये होती हैं कि सबसे पहले यह कविता विचार कविता होती है। एक–एक शब्द के कई अर्थ परत–दर–परत खुलते जाते हैं। इस प्रकार की कविता में जीवनानुभव की बात भोगे हुए यथार्थ मानों सामने दिखलाई पड़ती है। क्योंकि ये वर्णनात्मक होती हैं। इनकी भाषा बोल–चाल से सम्पृक्त होने के कारण उसमें स्थानीयता का गहरा रंग भी झलकता है।


प्रश्‍न 10
 – कविता में किस प्रश्न को उठाया गया है? आपकी समझ में इसके भीतर से और कौन से प्रश्न उठते हैं?
उत्तर – प्रस्तुत कविता में देश की ज्वलन्त समस्याओं की ओर कवि ने ध्यान आकृष्ट किया। है। इस देश की जनता अबोध और चेतनाविहीन है। वह अंधविश्वासों, अफवाहों में जी रही है।

सत्य से कोसों दूर नीति–नियम हैं। सिद्धान्त और व्यवहार में काफी असमानता है।

कवि ने अपनी कविताओं के माध्यम से जीवन की विसंगतियों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है। जनता की हालत दयनीय है। श्रमिक वर्ग कष्ट में जी रहा है। बौद्धिक वर्ग संकट मेकं जी , रहा है। उसे विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं मिली है। संस्कृति पर खतरा दिखायी पड़ता है। शासक वर्ग बेपरवाह मौज–मस्ती जश्न में अपना समय बीता रहा है और नागरिक भूख की. ज्वाला में तड़प रहा है। सुरक्षा देनेवाले भी गैर जिम्मेवार है। झूठे–मूठे भुलावा में सभी लोग जी रहे हैं। सत्य से प्रजा को दूर रखने की कोशिश हो रही है। बौद्धिक वर्ग सर्वाधिक संकट में जी रहा है। वह राष्ट्र निर्माण में संकल्पित होकर तो लगा है लेकिन उचित सम्मान और स्थान नहीं मिलता। इतिहास हम भूल रहे हैं। दिग्भ्रमित होकर भटकाव की स्थिति में जी रहे हैं।


भाषा की बात


प्रश्‍न
1 – हार–जीत में कौन समास है?
उत्तर – हार–जीत = हार और जीत–द्वन्द्व समास।


प्रश्‍न
2 – ज्यादातर में ‘तर’ प्रत्यय है, ‘तर’ प्रत्यय से पाँच अन्य शब्द बनाएँ।
उत्तर – कमतर, लघुतर, अधिकतर, निम्नतर, मेहतर।


प्रश्‍न
3 – निम्नलिखित के पर्यायवाची शब्द चुनें
उत्तर –

  • युद्ध–जंग, फसाद, रण, लड़ाई, वार, संग्राम, समर, कलह।
  • सेना–वाहिनी, लश्कर, सैन्य।
  • शत्रु–अप्रिय, अरिष्ट, दुश्मन, द्रोही।
  • सड़क–पथ, रास्ता, राह, पंथ, मार्ग, डगर।
  • रोशनी–प्रकाश, उजाला, ज्योति, उजियाला।
  • उत्सव–जश्न, त्योहार, पर्व, महोत्सव।
  • शहर–नगर, पुर, पुरी, टाउन, स्थान, नगरी।
  • विजय–जय, जीत, फतह, सफलता।
  • हार–पराजय, पराभव, शिकस्त, नाकामयाबी।


प्रश्‍न
4 – उत्पत्ति की दृष्टि से निम्नलिखित शब्दों की प्रकृति बताएँ। रोशनी, सड़क, अवकाश, रथ, सिर्फ, सच, बूढ़ा।
उत्तर –

  • रोशनी – फारसी
  • सड़क – अरबी
  • अवकाश – संस्कृत
  • रथ – संस्कृत
  • सेना – संस्कृत
  • सिर्फ – फारसी
  • नागरिक – संस्कृत
  • सच – संस्कृत
  • बूढ़ा – हिन्दी


प्रश्‍न
5 – ‘हार’ प्रत्यक्ष से पाँच अन्य शब्द बनाएँ और उसका अर्थ बताएँ।
उत्तर –

  • खेवनहार = खेनेवाला।
  • पालनहार = पालन करने वाला।
  • चन्द्रहार = एक तरह का कंठहार।


प्रश्‍न
6 – ‘विजय पर्व’ में कौन समास है?
उत्तर – विजय पर्व = विजय का पर्व (षष्ठी तत्पुरुष समास)


प्रश्‍न
7 – निम्नलिखित पंक्तियों से सर्वनाम चुनें एवं यह बताएँ कि वे किस सर्वनाम के उदाहरण हैं?
(क) किसी के पास पूछने का अवकाश नहीं है।
(ख) यह भी नहीं कि शत्रु कौन था।
(ग) वे उत्सव मना रहे हैं।
(घ) उन्हें सिर्फ इतना पता है कि उनकी विजय हुई।

उत्तर –

         शब्द –            सर्वनाम

  • किसी के – अनिश्चय वाचक सर्वनाम
  • यह भी – निश्चयवाचक सर्वनाम
  • कौन – प्रश्नावाचक सर्वनाम
  • वे – पुरुषवाचक सर्वनाम
  • उन्हें – पुरुषवाचक सर्वनाम
  • उनकी – पुरुषवाचक सर्वनाम (अन्य पुरुष)
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